आजकल हरतरफ खबरों में सुनने को मिल रहा है कि डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होता जा रहा है यानि गिरता ही जा रहा है। यह सिर्फ एक आंकड़ा मात्र नहीं, बल्कि हर आम आदमी जो भारत में रह रहे है उनकी ज़िंदगी से, महंगाई से, व्यापार और देश की अर्थव्यवस्था से सीधा जुड़ा विषय है। इस ब्लॉग में हम आसान भाषा में समझेंगे कि रुपया क्यों गिरता है, इसके कारण क्या हैं और इसका असर हम पर या पुरे भारत वासी पर कैसे पड़ता है।
आईए जानते हैं:-

- Dollar “डॉलर” की बढ़ती ताकत (Strong US Dollar): जब भी किसी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है या होने लगती है और उस देश का केन्द्रीय बैंक ब्याज का दरें बढ़ा देती है, तो ये अधिक संभव हो जाती है की निवेशकों भी उसी देश की करेंसी पर ही निवेश करेंगे| बिलकुल यही कारण है क्योंकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत है या और मजबूत होती जा रही है और वहां का केंद्रीय बैंक (Federal Reserve) ब्याज दरें बढ़ाता है, तो निवेशक डॉलर में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित समझते हैं। क्योंकि वंहा की करेंसी डॉलर है| और इस कारण से डॉलर की मांग बढ़ती है| और अन्य देशों की करेंसी कमजोर होती है, जिसमे भारत भी सामिल है|
- कच्चे तेल की ऊंची कीमतें (Crude Oil Prices)
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। और इस दौरान लेन-देन जो होता है वो डॉलर से ही होता है, और भारत अपना INR को डॉलर में कन्वर्ट करके डॉलर में तेल को खरीदती है, और तेल महंगा होने पर ज्यादा डॉलर खर्च होते हैं और इस तरह से डॉलर की मांग बढ़ जाती है, क्योंकि डॉलर की मांग जितना बढ़ेगी डॉलर उतना ही मजबूत होता चला जायेगा, और ये स्वाभाविक हो जाता है की अन्य देश की करेंसी कमजोर होगी, जिसमे भारत भी सामिल है, ये भी एक कारण हो सकता है|
- विदेशी निवेशकों का पैसा निकलना (FII Outflow)
जब विदेशी संस्थागत निवेशक (FII):ये बात तो बिलकुल सही है की विदेशी निवेशक भी भारत में निवेश किये होंगे पर भारतीय बाज़ार की स्थिति ऐसा है की बहुत सारे वेदिशी निवेशक अपना पैसा भारतीय बाज़ार से निकलकर ले जा रही है और अपना पैसा डॉलर में निवेश कर रही है, तो बाजार में रुपये की आपूर्ति बढ़ जाती है और उसकी कीमत गिर जाती है। ये भी एक कारण हो सकती है|
- व्यापार घाटा (Trade Deficit)
भारत में अक्सर: आयात (Import) ज्यादा होता है यानि भारत दुसरे देश से ज्यादा सामान खरीदती है, तो ज्यादा आयात = ज्यादा डॉलर की जरूरत होती है, और निर्यात (Export) कम करती है यानि दुसरे देश को ज्यादा सामान बेच नहीं पाती है, तो कम निर्यात = कम डॉलर की कमाई होती है इससे रुपया कमजोर होता है। ये भी एक कारण हो सकती है|
- महंगाई दर (Inflation)
अगर किसी देश में महंगाई ज्यादा होती है तो: उस देश की मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है, और जैसा की देखा जा सकता है की पिच्छले कुछ सालों से भारत में महंगाई की दर लगातार बढता गया है| महंगाई दर बड़ने के कारण भी विदेशी निवेशक निवेश से कतराते हैं| और इसका इसका असर रुपये की कीमत पर पड़ सकता है। ये भी एक कारण हो सकता है|
- वैश्विक अनिश्चितता और संकट
युद्ध, वैश्विक मंदी, महामारी या राजनीतिक तनाव जैसे हालात में जब देश होती है तो ये एक बहुत बड़ा कारण हो जाता है की निवेशक एक सुरक्षित करेंसी की ओर भागते हैं, जैसे: US Dollar, Gold ऐसे समय या हालत में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी “जैसे रुपया” कमजोर होती है।
- RBI की भूमिका और सीमाएं
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI):भारतीय रिज़र्व बैंक अपने पास कुछ डॉलर को रिजर्व रखती है, और जब रूपये गिरते हैं तो डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश करता है| पर डॉलर को कम रिजर्व रखना भी एक कारण हो सकता है|
फॉरेक्स रिज़र्व का इस्तेमाल करता है RBI के पास विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) होता है, जिसमें शामिल हैं: US Dollar RBI इन रिज़र्व का इस्तेमाल करके: बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाता है, रुपये को अत्यधिक गिरने से रोकता है इससे निवेशकों में भरोसा बना रहता है, और इस तरीके से RBI चाहे तो स्थिति को संभाल सकता है।
डॉलर के मुकाबले रुपया गिरना किसी एक वजह से नहीं होता है, बल्कि कई घरेलू और वैश्विक कारणों का परिणाम हो सकता है। डॉलर पर अधिक निवेशक होने के कारण डॉलर मजबूत होता है, महंगा कच्चा तेल, विदेशी निवेशकों की निवेश और वैश्विक हालात—ये सभी मिलकर रुपये को प्रभावित करते हैं।
अगर सरकार, RBI और निर्यात यानि स्पोर्ट को बढ़ावा देने वाली नीतियां सही दिशा में काम करें, तो रुपये को मजबूती मिल सकती है।


